Skip to content Skip to footer

निवेशकों को पता होनी चाहिए बॉन्ड के बारे में 4 विशेष बातें / 4 Key Things About Bonds Investors Should Know

Key things to know about bonds

Bond निवेश के सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है जिसे एक अच्छी रिटर्न के साथ एक अच्छी इनकम भी प्राप्त की जा सकती है। अगर बॉन्ड में समझदारी के साथ निवेश किया जाए तो यह निवेश के सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है। बॉन्ड में भारत में कई अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले काफी कम निवेश किया जाता है, जिसका मुख्य कारण जानकारी का अभाव है। अगर आप बॉन्ड में निवेश करने के बारे में सोच रहे है तो यह लेख पूरा पड़े क्योंकि इसलिए एक में हम आपको बॉन्ड से जुड़ी 4 वह बाते बताएंगे जो हर निवेशक को पता होनी चाहिए।

बॉन्ड के बारे में यह 4 विशेष बातें पता होनी चाहिए निवेशकों को!(4 Key Things About Bonds that investors should know)

हर व्यक्ति चाहता है कि वह इस तरह से निवेश करेगी उसके द्वारा निवेश किए गए पैसे में अधिक से अधिक वृद्धि हो सके परंतु जानकारी के अभाव के कारण अधिकतर लोग अपने पैसों पर अच्छा रिटर्न नहीं बना पाए। सुरक्षित निवेशों में सबसे बेहतरीन रिटर्न और आय देने वाला निवेश विकल्प बॉन्ड है, जिसके बारे में काफी कम लोग जानते है। अगर आप बॉन्ड में निवेश करना चाहते है तो ऐसी 4 बातें हैं जो आपको पता होनी चाहिए! बॉन्ड से जुड़ी वह 4 विशेष बातें (4 Key Things About Bonds)कुछ इस प्रकार है:

1. बॉन्ड से जुड़ी सामान्य विशेषताएं (Basic Bond Characteristics in Hindi)

अगर आप बॉन्ड में निवेश करने जा रहे हो तो आपको जो आपको सबसे पहले इससे संबंधित अच्छी खासी जानकारी होनी चाहिए जिसके लिए आपको कौन से जुड़े हुए सामान्य विशेषताओं के बारे में जानना होगा। अगर आप नहीं जानते कि बॉन्ड क्या है? तो सबसे पहले जानकारी के लिए बता दे की बॉन्ड एक प्रकार का लोन होता है जो कंपनियां या संस्थाएं प्राप्त करती है बॉन्ड जारी करके और उसे वह एक intrest rate के साथ चुकती है, यही इन्टरेस्ट रेट उन लोगों के लिए रिटर्न बनता है जो बॉन्ड में निवेश करता है अर्थात एक तरह से लोन देते हैं।

अगर आप बॉन्ड को सटीक रूप से समझना चाहते हो तो बता दे की जब सरकार को या फिर किसी संस्था को लोन चाहिए होता है तो वह बैंक के पास जाने की जगह है जब सीधे निवेशकों से पैसा लेती है तो ऐसे में वह बॉन्ड जारी करती है, जब निवेशक उसे बॉन्ड में निवेश करते हैं तब वह एक तरह से संस्था या फिर सरकार को उधार दे रहे होते हैं जिसे वह ब्याज के साथ लौटाती है। बॉन्ड एक प्रकार का लीगल डॉक्युमेंट होता है, जो बताता है की संस्था द्वारा लोन लिया गया है जिसे वह चुकाने के लिए बाध्य होती है।

2. बॉन्ड के प्रकार (Types of Bonds in Hindi)

अगर आप Bond में निवेश करना चाहते हो तो इसके लिये यह बेहद ही जरूरी है की आप इसकी पूरी जानकारी ले क्युकी बिना जानकारी के किया गया निवेश, सही निवेश साबित नहीं होगा। बॉन्ड एक नहीं कई तरह के होते है तो ऐसे में अगर आप बॉन्ड में निवेश करना चाहते हो तो अगर आप बॉन्ड में निवेश करने की सोच रहे हो तो यह जानना जरूरी है की आप 'बॉन्ड के प्रकार' (Types of Bonds in Hindi) जान लो। बॉन्ड को अलग अलग तरीकों से कई प्रकारों में बाटा गया है, परंतु इसके 3 मुख्य प्रकार यह हैं:

Corporate Bonds: अगर आप कॉरपोरेट बॉन्ड के बारे में नहीं जानते तो बता दे कि कॉरपोरेट बॉन्ड उन बॉंडस को कहा जाता है जो कंपनियों के द्वारा जारी किए जाते हैं अपने एक्सपेंस को पे करने के लिए या फिर केपिटल रैज़ करने के लिए। इनमें भी कई तरह के बॉन्ड होते है जो रिस्क और रिटर्न के आधार पर बटे हुए होते है, जिनमें रिस्क अधिक होते है, वह रिटर्न भी अच्छा देते है। इस तरह के बॉन्ड में निवेश करने से आने वाले रिटर्न पर सामान्य तौर पर Income Tax भी देना होता है।

Sovereign Bonds: अगर आप नहीं जानते की आखिर Sovereign Bonds किसे कहा जाता है तो बता दे की इनका दुसरा नाम Government Bond है जो सरकार के द्वारा इशू किए जाने वाले बंद होते हैं और इनका क्रेडिट स्कोर रेटिंग्स काफी हाई होती है अर्थात इनमें रिस्क काफी कम होती है पर वहीं दूसरी तरफ इनमें मिलने वाला इन्टरेस्ट भी काफी कम होता है। इस तरह के बॉंडस में निवेश करने पर निवेशकों को रिटर्न थोड़ा कम मिलता है परंतु उनका कैपिटल अमाउंट सुरक्षित रहता है।

Municipal Bonds: मुनिसिपल बॉन्ड उन बॉंडस को कहा जाता है जो मुख्य सरकार अर्थात नेशनल गवर्नमेंट के द्वारा नहीं बल्कि लोकल गवर्नमेंट के द्वारा जारी किया जाता है। यह एक प्रकार के गवर्नमेंट बॉन्ड ही है परंतु इनमें कई तरह के बेनिफिट्स मिलते हैं जिसके चलते लोग इन में निवेश करना पसंद करते हैं जैसे कि कई बार इनमें काफी अच्छा रिटर्न मिलता है तो कई बार यह बॉन्ड टैक्स बेनएफिट्स के साथ भी आते है। यही कारण है की Municipal Bonds निवेशकों के लिए काफी अट्रैक्टिव हो जाते हैं।

Read Also:- डीमैट अकाउंट के माध्यम से शेयर खरीदने और बेचने की प्रक्रिया – How to Buy and Sell Stocks form Demat Account in Hindi

3. बॉन्ड से जुड़े महत्वपूर्ण पद (Key Terms of Bonds in Hindi)

इस बात में कोई दो राय नहीं हैं की बॉन्ड निवेश के सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है जिनमें सटीक रूप से निवेश किया जाए तो यह काफी अच्छा रिटर्न दे सकते है, लेकिन अगर आप बॉन्ड में निवेश करना चाहते हो तो उसके लिए पहले आपको इसकी पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए। अगर आप बॉन्ड की पूरी जानकारी लेना चाहते हो तो आपको इससे जुड़े Key Terms पता कर लेने चाहिए। बॉन्ड से जुड़े महत्वपूर्ण पद (Important Key Terms of Bonds in Hindi) के बारे में बात की जाए तो वह कुछ इस प्रकार है:

Maturity: बॉन्ड से जुड़ा एक महत्वपूर्ण की टर्म है मेच्योरिटी, जो की उस डेट या समय को कहा जाता है, जब तक की बॉन्ड जारी करने वाली संस्था को बंद में निवेश करने वाले निवेशक को प्रिंसिपल अमाउंट लौटना होता है। मैच्योरिटी के अनुसार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म बॉन्ड हो सकते हैं, जिनकी मैच्योरिटी कमियां ज्यादा होती है।

Secured/Unsecured: बॉन्ड से जुड़ा हुआ एक की दम है सिक्योर्ड या फिर इनसिक्योर जो बॉन्ड के टाइप के अनुसार निर्धारित होता है। सिक्योर्ड बॉन्ड में कॉलेटरल होता है जिससे कि कंपनी बॉन्ड का भुगतान न करे तो भी बेशक सुरक्षित रहता है जबकि अनसिक्योर्ड बंद में किसी प्रकार का कोई कॉलेटरल नहीं होता।

Liquidation Preference: जब कोई कंपनी दिवालिया हो जाती है और उसने बॉन्ड जारी किए हुए होते हैं तो ऐसे में वह पहले अपने एसेट को बेचकर बॉन्ड चुकाती है जिसमें पहले सीनियर बॉन्ड का जाते हैं और उसके बाद जूनियर बॉन्ड का जाते हैं फिर बाकी का बच्चा कुत्ता स्टेप होल्डर को मिलता है।

Coupon: कूपन अमाउंट उस इंटरेस्ट अमाउंट को कहा जाता है जो निवेशकों को एनुअल या फिर सेमी एनुअली रूप में भुगतान किया जाता है। कूपन को कूपन रेट या फिर यील्ड रेट भी कहा जाता है जो सामान्य तौर पर बॉन्ड की फेस वैल्यू को एनुअल पेमेंट्स से डिवाइड करके निकाला जाता है।

Tax Status: जहां अधिकतर बॉन्ड टैक्सेबल होते हैं तो वही काफी सारे पॉइंट ऐसे भी होते हैं जो टैक्स बेनिफिट्स के साथ आते हैं अर्थात उनमें निवेश करने पर निवेशकों को टैक्स बेनिफिट्स मिलते हैं और सामान्य तौर पर यह बॉन्ड गवर्नमेंट बॉन्ड या फिर म्युनिसिपल बॉन्ड होते हैं जो नेशनल गवर्नमेंट या फिर लोकल गवर्नमेंट के द्वारा जारी किए जाते हैं।

Callability: कुछ बॉन्ड उसे जारी करने वाली संस्था के द्वारा मेच्योरिटी डेट से पहले भी भुगतान किया जा सकते हैं जिसके लिए बॉन्ड का कॉल प्रोविजन होना जरूरी है। इस प्रकार के पहले किए जाने वाले भुगतान आम तौर पर मामूली प्रीमियम पर ही किए जाते है। इस सुविधा को ही बॉन्ड निवेश दुनिया में 'Callability' कहा जाता है।

4. बॉन्ड से जुड़े हुए रिस्क (Risks of Bonds in Hindi)

किसी भी निवेश विकल्प में निवेश करने से पहले उससे संबंधित रिस्क के बारे में जानना जरूरी है, जिससे की आप सोच समझ कर ही उस निवेश विकल्प में निवेश कर पाए। अगर आप बॉन्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह बेहद ही जरूरी है की आप बॉन्ड से जुड़े हुए रिस्क के बारे में पता रखे। अगर आप नहीं जानते की 'बॉन्ड से जुड़े हुए रिस्क' (Risks of Bonds in Hindi) क्या है, तो जानकारी के लिए बता दे की वैसे तो बॉन्ड सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है लेकिन इसमें भी कुछ रिस्क होते हैं जो इस प्रकार है:

Interest Rate Risk: इंटरेस्ट रेट एक प्रकार से बंद के साथ विपरीत संबंध साझा करती है क्योंकि जब इंटरेस्ट रेट बढ़ती है तो बंद गिर जाते हैं और बॉन्ड बढ़ते हैं तो इंटरेस्ट रेट कम हो जाती है। इन्टरेस्ट रेट रिस्क तब आती है जब रेट अचानक से बढ़ जाती है और निवेशक को उसकी रुचि के अनुसार इन्टरेस्ट नहीं मिलता।

Credit/Default Risk: कई अन्य निवेश विकल्पों की तरह ही बॉन्ड में भी क्रेडिट/डिफ़ॉल्ट रिस्क होती है जिसके बारे में निवेशकों को पता होना चाहिए। यह समस्या मुख्य रूप से कॉर्पोरेट बॉन्ड में ही होती है, तो ऐसे में निवेशकों को केवल उन कंपनियों के बॉन्ड में ही निवेश करना चाहिए जिनका अवेलेबल कैश ज्यादा हो।

Prepayment Risk: Prepayment Risk बॉन्ड से जुड़े हुए सबसे बड़े रिस्क में से एक होता है जिसमें जब बॉन्ड जारीकर्ता पहले ही निवेशकों को बॉन्ड अमाउन्ट चुका देता है तो ऐसे में हो सकता है की उन्हे रिटर्न कम मिले और उन्हे कम रिटर्न के साथ वापस अपने पैसों को निवेश करना पड़े। कई मामलों में यह देखा गया है।

निष्कर्ष!

इस बात में कोई दो राय नहीं है की बॉन्ड निवेश के सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक हैं जिनमे अगर सटीक रूप से निवेश किया जाए तो काफी अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है लेकिन इस बात में भी कोई दो राय नहीं है की भले ही निवेश विकल्प कोई भी हो और कितना ही सुरक्षित क्यों ना हो, बिना जानकारी के उसमें निवेश नहीं करना चाहिए। यही कारण हैं की हमने यह लेख तैयार किया यहीं जिसमें हमने वह 4 विशेष बातें बताई हैं जो हर उस निवेशक को पता होनी चाहिए जो बॉन्ड में निवेश करने के बारे में सोच रहा है।

Read Also:- फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट क्या होता है – Fixed Income Investment Explained in Hindi

FAQ!

प्रश्न: बॉन्ड क्या होता है?

उत्तर: बॉन्ड एक प्रकार debt investment होता हैं जिसमें निवेश करके निवेशक एक तरह से डेब्ट में निवेश करता हैं जो वह बॉन्ड जारीकर्ता को देता हैं। बॉन्ड में निवेश करते हुए एक तरह से निवेशक बॉन्ड जारिकर्ता को उधर देता है जो इसे ब्याज के साथ वापस मिलता हैं रिटर्न के रूप में।

प्रश्न: बॉन्ड कितने प्रकार के होते है?

उत्तर: वैसे तो बॉन्ड को कई अलग अलग तरीकों से कई प्रकारों में बाटा गया है लेकिन देखा जाए तो बॉन्ड सामान्य तौर पर मात्र 3 प्रकार के ही होते हैं जिनमें कॉर्पोरेट बॉन्ड, गोवर्मेंट बॉन्ड और म्युनिसिपल बॉन्ड शामिल होते हैं जिनमें हर तरह के बॉन्ड के अपने अपने फायदे और नुकसान होते है।

प्रश्न: क्या बॉन्ड में निवेश करना सही हैं?

उत्तर: जी हाँ, बॉन्ड सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माने जाते हैं जिनमें काफी सारे समझदार निवेशक निवेश करते हैं क्युकी बॉन्ड में निवेश करते हुए सामान्य तौर पर कई अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों के मुकाबले बेहतर रिटर्न प्राप्त किए जा सकते है, जो इसे एक अच्छा निवेश विकल्प बनाता हैं।